फर्जी पासपोर्ट मामला: अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को 7 साल की सजा
माफिया डॉन छोटा राजन वर्तमान में नई दिल्ली की उच्च सुरक्षा वाली तिहाड़ जेल में बंद है, जहां वह एक अन्य मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।by: सुदाम पेंढारे
चेन्नई (३१ जुलै २०२६) - चेन्नई की एक विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने 30 जुलाई 2026 को फर्जी पासपोर्ट मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन (उर्फ विजया कदम उर्फ राजेंद्र उर्फ नाना) को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 55,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने उसे धोखाधड़ी, जालसाजी, रूप बदलकर (पहचान छिपाकर) धोखा देने और पासपोर्ट बनवाने के लिए जानबूझकर फर्जी दस्तावेज जमा करने के गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया है।
माफिया डॉन छोटा राजन वर्तमान में नई दिल्ली की उच्च सुरक्षा वाली तिहाड़ जेल में बंद है, जहां वह एक अन्य मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
क्या है पूरा मामला?-
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 19 मार्च 2002 को छोटा राजन के खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि मुंबई के निवासी राजेंद्र उर्फ नाना उर्फ छोटा राजन (पिता- सदाशिव) ने अपनी असली पहचान छिपाकर विजया कदम के नाम से भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था।
फर्जी दस्तावेजों का किया गया इस्तेमाल-
छोटा राजन ने चेन्नई के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को धोखा देने के लिए उम्र और पते के प्रमाण के तौर पर स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC), राशन कार्ड और डिमांड ड्राफ्ट (DD) जैसे फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। उसने विजया कदम का रूप धरकर इन जाली दस्तावेजों को असली के तौर पर पेश किया और बेईमानी व धोखाधड़ी से पासपोर्ट हासिल कर लिया।
22 साल बाद आया फैसला-
इस मामले की विस्तृत जांच पूरी करने के बाद, सीबीआई ने 22 जनवरी 2004 को छोटा राजन के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया था। मामले की सुनवाई और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद, माननीय अदालत ने ट्रायल पूरा करते हुए अंततः उसे इन सभी आरोपों में दोषी करार दिया और सजा सुनाई।